इन सिद्धांतों में:
1.1. मनुष्य - प्रत्येक प्राकृतिक व्यक्ति, जो नागरिकता, मूल, जन्म-स्थान और निवास-स्थान से स्वतंत्र रूप से इन सिद्धांतों के अनुसार अधिकारों का धारक है।
1.2. व्यक्ति का आत्मनिर्णय - मनुष्य की वह क्षमता कि वह अपनी ही इच्छा से अपनी राजनीतिक संबद्धता निर्धारित करे, जिसमें ऐसी संबद्धता को स्थापित करने, उसमें प्रवेश करने और उसे समाप्त करने की क्षमता सम्मिलित है। इन सिद्धांतों के अनुसार राजनीतिक संबद्धता राज्य-संबद्धता के समान नहीं है।
1.3. प्राथमिक संबद्धता - मानवता और पृथ्वी ग्रह के प्रति मनुष्य की अहस्तांतरणीय संबद्धता, जो मनुष्य की इच्छा और किसी भी राज्य की इच्छा पर निर्भर नहीं है।
1.4. द्वितीयक (आत्मनिर्धारित) संबद्धता - वह संबद्धता, जिसे मनुष्य अपनी ही इच्छा से स्थापित करता है, जिसमें किसी अ-प्रादेशिक समुदाय के प्रति संबद्धता भी सम्मिलित है।
1.5. अ-प्रादेशिक समुदाय - लोगों का स्वैच्छिक संगठन, जिसका अस्तित्व और जिसकी सदस्यता क्षेत्र के स्वामित्व पर तथा प्रतिभागियों के निवास-स्थान पर निर्भर नहीं है। अ-प्रादेशिक समुदाय के पास प्रादेशिक अधिकारक्षेत्र नहीं है और वह बाध्यकारी सत्ता का प्रयोग नहीं करता।
1.6. दर्जा - मनुष्य की वह कानून द्वारा मान्यताप्राप्त स्थिति, जो वह प्राथमिक और द्वितीयक संबद्धता के धारक के रूप में रखता है।
1.7. अ-न्यूनीकरण का सिद्धांत - वह नियम, जिसके अनुसार इन सिद्धांतों में कुछ भी नागरिकता, राज्यों के अधिकारक्षेत्र और प्रवर्तमान मानव अधिकारों को रद्द, प्रतिस्थापित या सीमित नहीं करता, बल्कि केवल उनका पूरक होता है।