विश्व के लगभग हर देश के पास एक संविधान है। हजारों अंतरराष्ट्रीय संधियाँ, वैश्विक संस्थाएँ और समन्वय के तंत्र विद्यमान हैं। फिर भी, इन सबके बावजूद, मानवता के पास एक साझा ग्रहीय संविधान क्यों नहीं है?
इसका उत्तर न विचारों की कमी में है, न विधिवेत्ताओं के अभाव में। ग्रहीय संविधान इसलिए नहीं उभरा क्योंकि उसे वहन करने में सक्षम कोई राजनीतिक कर्ता ही नहीं है। संविधान वहाँ जन्म लेता है जहाँ एक राजनीतिक कर्ता पहले से विद्यमान हो — जो किसी साझी सर्वोच्च मानदंड को अपने लिए बाध्यकारी मानने को तत्पर हो। राज्यों के लिए वह कर्ता 'जनता' है। किंतु समग्र मानवता के लिए ऐसा कोई कर्ता अभी तक अस्तित्व में नहीं आया।
इसी रिक्तता में दोनों दस्तावेज़ों की व्यावहारिक सार्थकता निहित है।
Earthlings घोषणापत्र उस कर्ता का निर्माण करता है — एक ग्रहीय नैतिक-राजनीतिक केंद्र की पहली स्वैच्छिक अभिव्यक्ति।
मानवता का संविधान उस कर्ता को एक सर्वोच्च मानदंड, एक उद्देश्य और उसके विकास की सीमाएँ प्रदान करता है।
दोनों दस्तावेज़ एक-दूसरे के बिना कार्य नहीं कर सकते।